लखीमपुर खीरी

जेल में क्या हुआ था? इलाज के दौरान महिला बंदी की मौत के बाद खुलने लगी जांच की परतें, 16 जून को सामने आएंगे गवाह

आबकारी अधिनियम में बंद 55 वर्षीय महिला की केजीएमयू में हुई थी मौत, डीएम के आदेश पर मजिस्ट्रियल जांच शुरू, कलेक्ट्रेट में दर्ज होंगे बयान और साक्ष्य।

जेल में बंद महिला की मौत… अब प्रशासन पूछ रहा है- आखिर क्या हुआ था? 16 जून को खुल सकते हैं कई राज।

लखीमपुर खीरी। जिला कारागार में निरुद्ध एक विचाराधीन महिला बंदी की उपचार के दौरान हुई मौत के मामले में अब मजिस्ट्रियल जांच शुरू हो गई है। प्रशासन ने घटना से जुड़ी जानकारी रखने वाले लोगों से सामने आकर साक्ष्य और बयान देने की अपील की है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर महिला बंदी की तबीयत कैसे बिगड़ी और इलाज के दौरान क्या-क्या घटनाक्रम हुआ?
मृतका की पहचान 55 वर्षीय अनीता पत्नी बदलू निवासी सैदापुर, थाना फूलबेहड़ के रूप में हुई है। वह आबकारी अधिनियम की धारा 60(2) के तहत दर्ज मुकदमे में 8 मई 2026 को जिला कारागार भेजी गई थीं और विचाराधीन बंदी के रूप में जेल में निरुद्ध थीं।
बताया गया कि जेल में रहते हुए उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई। प्रारंभिक उपचार जेल चिकित्साधिकारी द्वारा किया गया, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर 9 मई की शाम उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया। जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद सीवीए (स्ट्रोक) की आशंका जताई और बेहतर उपचार के लिए उन्हें किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) लखनऊ रेफर कर दिया।
केजीएमयू में भर्ती महिला बंदी का इलाज चल रहा था, लेकिन 11 मई 2026 की सुबह 5 बजकर 7 मिनट पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। महिला बंदी की मौत के बाद पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं।
अपर उपजिलाधिकारी अर्चना ओझा ने इस संबंध में सार्वजनिक सूचना जारी करते हुए कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को इस घटना के संबंध में कोई जानकारी है या वह कोई तथ्य, साक्ष्य अथवा अभिकथन प्रस्तुत करना चाहता है तो वह 16 जून 2026 को पूर्वाह्न 11 बजे कलेक्ट्रेट स्थित न्यायालय कक्ष संख्या-22 में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकता है।
प्रशासन का कहना है कि जांच का उद्देश्य महिला बंदी की मृत्यु से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल करना है। जांच अधिकारी सभी पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगी।
महिला बंदी की मौत के बाद अब सबकी निगाहें 16 जून को होने वाली सुनवाई और जांच प्रक्रिया पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि सामने आने वाले बयान और साक्ष्य कई महत्वपूर्ण तथ्यों से पर्दा उठा सकते हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि जो भी व्यक्ति घटना के बारे में जानकारी रखता है, वह बिना किसी संकोच के जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकता है।
अब देखना यह होगा कि मजिस्ट्रियल जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और महिला बंदी की मौत के मामले में किन परिस्थितियों का खुलासा होता है।

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